Loading... भूख (Bhookh) सुभाष (Subhash) 1111015976784
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Book Code: 1111015976784

सुभाष (Subhash)

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लेखक के बारे में
वाणिज्य एवम् विपणन से प्रबंधन किए हुए श्री सुभाष पूर्णरूप से भारतवंशी हैं तथा पेशे से बैंकर हैं। श्री सुभाष वर्तमान समय के हिन्दी के उभरते हुए रचनाकार हैं। जिन्होंने इस युक्ति को चरितार्थ किया है कि भावनाओं का त्वरित आवेग ही कविता है। इनकी पहली काव्य प्रति संवेदना है तथा यह इनकी दूसरी स्वरचित काव्य संकलन है ।
इन कविताओं को पढ़कर ऐसा लगता है कि ये समाज के अन्तः कोलाहल और आर्थिक, सामाजिक, भेदभाव एवम् शोषण के प्रति आवाज है ।
आप कवि को अपने विचारों से निम्नलिखित ईमेल पर संपर्क कर सकते हैः subhashaaa@gmail.com
इस पुस्तक मे प्रकाशित कवितायें कवि द्वारा मूल रूप से स्व रचित हैं एवम् किसी भी अन्य व्यक्ति आदि के कॉपीराइट का उल्लंघन नहीं किया गया है।

कविताओं में व्यक्त भावनायें कवि की अपनी हैं तथा अगर किसी की भावनाओं को ठेस पहुंचती है तो कवि का नियोक्ता एवं प्रकाशक इसके लिए उत्तरदायी नहीं होगा।


पुस्तक के बारे में

इस कविता संग्रह भूख में मैंने समाज के अन्तः कोलाहल और आर्थिक, सामाजिक, भेदभाव एवम् शोषण के प्रति वर्तमान स्थिति को दर्शाया है। यहाँ मैंने अपनी वैचारिक अभिव्यक्ति और इसके समाज के साथ के परस्पर द्वंद को कविताओं के माध्यम से प्रकट किया है ।
यह मेरा एक प्रयास है और ऐसा विश्वास है कि यह सतत और निरंतर गतिशील रहेगा।

मेरी पहली काव्य कृति संवेदना है तथा यह मेरी यह दूसरी स्वरचित काव्य संकलन है। कुछ मंचों से इन कविताओं का पाठ किया है। त्रुटियों की ओर आप ध्यान आकृष्ट कराएंगे, ऐसी मैं उम्मीद करता हूँ।

अनुक्रम
प्रस्तावना ------------------------------------------------------------------------------------ 9
1- भवदीय, सिकुड़ा सपाट, भूखा पेट------------------------------------- 11
2- वही भूख, वही गरीबी ------------------------------------------------------ 13
3- जिंदगी की छपाई, कुछ पढ़ने की कोशिश थी ------------------- 15
4- रहो तुम या न रहो ----------------------------------------------------------- 17
5- रे बाबू:------- ---------------------------------------------------------- 19
6- मै क्यों फक्कड़हाल हूँ ----------------------------------------------------- 21
7- रावण है सब-------------------------------------------------------------------- 23
8- फिक्र कहाँ --------------------------------------------------------------------- 25
9- प्राण पखेरू, पल पल होता ----------------------------------------------- 27
10- क्यों इस दिन ------------------------------------------------------------------- 29
11- कोरा किताब -------------------------------------------------------------------- 31
12- छल-कपट ----------------------------------------------------------------------- 33
13- बस एक मोबाइल ------------------------------------------------------------- 35
14- रात का अँधेरा, कहाँ डराता है ------------------------------------------ 37
15- प्रजातंत्र की महिमा देखो !------------------------------------------------ 38
16- कहीं ये, मैं तो नहीं! -------------------------------------------------------- 40
17- ये कौन, यहाँ का है, या कहीं और रहता है--- ------------------- 41
18- इक इंतजार है इंतजार का ------------------------------------------------- 44
19- वक्त की -------------------------------------------------------------------------- 45
20- मुकदमा दायर किया है ----------------------------------------------------- 47
21- इक प्रेम का---- ----------------------------------------------------------------- 49
22- आज की जीने की खुराक मिल गई ---------------------------------- 51
23- मेरे रूह की शिरकत -------------------------------------------------------- 54
24- लोल है ढोल है --------------------------------------------------------------- 55
25- झुरमुट इन कुकुरमुत्तों की -------------------------------------------------- 57
26- लाशों की बस्ती में, जिन्दा है कौन------------------------------------ 59
27- बादलो की हूँजूम में, -------------------------------------------------------- 61
28- मेरे साथ ही रहो -------------------------------------------------------------- 62
29- चाहतों की बेकरारी----------------------------------------------------------- 64
30-वक्त का साथ घड़ी को न मिला, हम कौन।---------------------- 66
31- राग ये कैसी, अगड़ बगड़ ------------------------------------------------ 68
32- चारदीवारी, दरवाजे सब टूटे ---------------------------------------------- 70
33- झांकता क्योंः कूड़े के अम्बारो में -------------------------------------- 71
34- ये काली सी सड़कें ---------------------------------------------------------- 73
35- जिंदगी एक ख्यालात--------------------------------------------------------- 75
36- जिंदगी, बढे चलो, बढे चलो--------------------------------------------- 77
37- ठूँठे पेड़ की व्यथाः उत्तरदायी कौन ----------------------------------- 79
38- जरा दूर से ही, मुस्करा तो दो ------------------------------------------- 81
39- उंगलियों की थिरकने की बेचैनी --------------------------------------- 83
40- जिंदगी नहीं अब रवानगी माँगता हूँ------------------------------------ 86
41- पत्थरों के आशियाने --------------------------------------------------------- 88
42- बंदिशें, बंदिशें, बंदिशें ------------------------------------------------------- 90
43- वर्तमान में जीने, एक मयखाने की ओर ----------------------------- 92
44- फुसलाते फूहड़ ----------------------------------------------------------------- 95
45- पता है - एक फुटपाथ, आई आई एम चार रास्ता ------------- 97
46- इश्किया खुमार ----------------------------------------------------------------- 99
47- रास्ते के पत्थर --------------------------------------------------------------- 100
48- ऐसे हैं, कुछ आज के मर्द ---------------------------------------------- 102
49- क्या अजीब बात है -------------------------------------------------------- 104
50- लकीरों का क्या दोष है -------------------------------------------------- 105
51- शब्दों से सृष्टि की व्याख्या, असंभव। ------------------------------ 107
52- हरफनमौला हैं, हम। ------------------------------------------------------- 109
53- मेरे दोस्त, मेरे मौत के बाद --------------------------------------------- 111
54- ठूँठे क्यों हो, रूठे क्यों हो, --------------------------------------------- 114
55- लिखना है, अलख जगाना है, एक सोच की!! ----------------- 115
56- आदतन, दिलफरेबी शायर हूँः ------------------------------------------ 117
57- मदिरा हूँ मै, मदहोश ------------------------------------------------------ 119
58- दिवे जिंदगानी, है ये मेरी जिंदगानी। -------------------------------- 121
59- वो कहती है ------------------------------------------------------------------ 122
60- मिट्टी का प्यार, सब हवा हो गया है ------------------------------- 124
61- होश है कहाँ ------------------------------------------------------------------ 126
62- मानवता की रीढ़ की हड्डी खिसक गई है----------------------- 128
63- ये जिंदगी और क्या -------------------------------------------------------- 130
64- मेरे एक हाथ दूसरे हाथ से बातें करते हैं ------------------------ 132
65- न बरसो, न गरजो ---------------------------------------------------------- 134
66- प्रकृति नेपथ्य ओर ---------------------------------------------------------- 136
67- ऐसा जला हूँ की------------------------------------------------------------ 138
68- थोड़ा सच्चा करते हैं ------------------------------------------------------ 139
69- ऐसा न होता, तो अच्छा था -------------------------------------------- 141
70- अछूता कौन, सब है गौण। ---------------------------------------------- 142
71- कष्ट क्यों, इस पथ पे। --------------------------------------------------- 144

 

 


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Last updated: 18-Jul-2019   Designed by IndiaPRIDE.com