Welcome to gyanbooks.com
Vivek Geeta
9789380222721

  
SEND QUERY
 
Author Shri Shri 108 Shri Beganath Ji Maharaj
Year 2015
Binding Paperback
Pages 148
ISBN10, ISBN13 9380222726, 9789380222721
Short Description
The Title 'Vivek Geeta written/authored/edited by Shri Shri 108 Shri Beganath Ji Maharaj', published in the year 2015. The ISBN 9789380222721 is assigned to the PaperBack version of this title. This book has total of pp. 148 (Pages). The publisher of this title is GenNext Publication. This Book is in Hindi. The subject of this book is Religion.
List Price: US $5.95
Your PriceUS $5.00
You Save10.00%
Looks for Similar Books by Keywords:
Hindi (language) | 2015 (year) |
Untitled Document

ABOUT THE AUTHOR

श्री श्री 108 श्री लाधूनाथ जी महाराज के शिष्य श्री बेगानाथ जी महाराज थे। श्री लाधूनाथ जी महाराज बिकानेर जिला के तहसील नौखामण्डी गाँव मसूरी राजस्थान के थे। श्री बेगानाथ जी महाराज का जन्म कार्तिक सुंदी दूज संवत् 1984 को गाँव रतन गढ़ व तहसील रतन गढ़ जिला चूरू राजस्थान में हुआ था। इनके पिता का नाम गुमाना राम माता का नाम धापी देवी था, और इनकी पत्नी का नाम तीजा देवी था इनका एक भाई श्री लाधू राम जी व एक बहन जड़ावा बाई था। इस ग्रन्थ (विवेक-गीता) को लिखने का हमारा एकमात्रा उद्देश्य है कि प्रत्येक प्राणी के हृदय में भक्ति रसधारा का प्रवाह हो सके। विवेक-गीता में श्री बेगानाथ जी महाराज के सम्पूर्ण जीवन के विषय में ज्ञान प्राप्त होगा और उनके मार्ग पर चलकर हम भी भक्तिमार्ग पर चल सके। इसमें गुरू की महिमा का वर्णन करते हुए कहा है कि गुरू देव तुल्य है। गुरू के बिना जीव की मुक्ति नहीं हो सकती। मुक्ति के दाता गुरू होते है। गुरू की महिमा का वर्णन सरल भाषा में इस ग्रन्थ में किया है। सत्संग का वर्णन करते हुए कहा हैμ जिस घर सत्संग सार नहीं वो घर भूत समान। ‘पिण्ड-ब्रह्मण्ड’ के विषय में सब कहाँ गया है कि सब का मूल एक ही परमात्मा है। अवगति से ऊँ (ओउम्) की उत्पत्ति हुई और ओउम् से आकाश की, आकाश से वायु की, वायु से तेज की, तेज से जल की और जल से पृथ्वी की रचना हुई है। तीन गुण और पच्चीस प्रकृति का मेल होने से काया रूपी नगरी की रचना हुई। ‘पिण्ड-ब्रह्मण्ड’ की उत्पत्ति के विषय में विस्तार से बताया गया है। यदि इस ग्रन्थ को पढ़कर एक भी व्यक्ति भक्ति मार्ग पर चलता है तो हमारा इस ग्रन्थ को लिखने का उद्देश्य सफल हो जाता है।

CONTENTS

विषय सूची 1. जीवन परिचय 11 2. विनायक देवा सुन लिज्यो अर्ज हमारी 21 3. गुरु देव दाता भव सागर से तारो 21 4. संता की महिमा कहा लग करुँ मै बड़ाई 22 5. गुरु देव दाता आज पावणा आया 22 6. गुरु दाता प्यायो अमृत नीर 22 7. गुरु देव दाता आयो शरण तुम्हारी 23 8. गुरु देव बतायो घट में ही आत्म राम 23 9. अब लिनि साधे गुरु चरणा की ओट 24 10. गुरु चरणा ध्रो शीश तजो वुफल लाजा 24 11. हो होशियार जाग नर सुता वृथा जन्म तेरा क्यों खोवे 24 12. अमृत प्याला सतगुरु भेज्या हो चेतन हम उर मे पीया 25 13. अमृत पीया अमर हो जावै हाथ शब्द का प्याला जी 25 14. साधे भाई क्या पूछो देश हमारा 26 15. संतो भाई अखै मण्डल घर न्यारा 26 16. अबदू पग बिन पंथ हमारा 26 17. आठों पहर राम ध्ुन लागी देव अखण्डी ध्याता जी 27 18. लाघूनाथ मुख बिन बौले तखड़ी पकड़ बणिये को तौले 27 19. हेली अखै महल वेफ माय अमर करतार है। 28 20. अबदू भजन अमर पफल पाया 28 21. हर को उँच-नीच नही भावै 28 22. साधे भाई इस विद गणेश मनायो 29 23. ;आरतीद्ध ओइम जय श्री ओकारा 29 24. ;आरतीद्ध नाथ जी की आरती होवे दिन राती 30 25. दोहा 30 26. पफकीरी बहुत कठिन मेरे भाई 31 27. पफकीरी पफक्कड़ वेफ मन भावै 31 28. पफकीरी घट भीतर दीदार 31 29. पफकीरी नहीं कायर को काम 32 30. पफकीरी-उडादे भ्रम को दूर 32 31. मेरा तो मैं आप हूँ रे जोगिया अब म्हानै दूजो दरशे नाय 32 32. चलो उर मायने रे जोगिया बाहर भटको नाय 33 33. चढ़ो गढ़ बाकड़े रे जोगिया वो जोगी जोग कमाय 33 34. राम रंग उजलो रे जोगिया कबहू न बदरंग होय 33 35. दोहा:μ तन छूटा मन कहाँ गया... 34 36. हेली सोहनी शिखर वेफ ऊपर शिखर एक ओर है 35 37. हेली समझ करो ना विचार अलख घर दूर है 35 38. हेली चाल बसो उन देश में 35 39. हेली चाल बसो उन देश में जहाँ संता की रैन जी 36 40. हेली चाल बसो उन देश पिफर नहीं आवणा 36 41. साधे भाई कहता हेला मारा। 37 42. साधे भाई ऐसा देश हमारा 37 43. साधे भाई क्या पूछो देश हमारे ने बेगम देश हमारा 37 44. साधे भाई उन बेगम को बासी 38 45. साधे कहूँ उन देश की शोभा कहीं नहीं जाए जी 38 46. साधे भाई ऐसा देश हमारा सत की खोज करी सत माही आवागमन से न्यारा 38 47. वैफसे कहूँ संतो देश हमारा 39 48. अविगत खेल रच्यो है भारी 39 49. अविगत लख्यो नहीं जावै 40 50. ध्रन नहीं गगन, पवन नहीं पानी वो ही देश हमारा 40 51. मैं नूरी निर्वाण हूँ जन्म-मरण मे नाही 40 52. क्या पूछो ज्ञान साधे ज्ञान घर तो दूर है 41 53. ठगनी क्यू ठगने को आई 41 54. कहता भेद अगम का साधे भाई 42 55. साधे भाई ऐसा बोल हम बोला 42 56. मन तु इस विद सिवरन कर रे 42 57. गगन घर बाज रही घड़ीयाला 43 58. गगन घर बाजै तंदूरो मेरे भाई 43 59. इन विद सुमिरन किजै साधै भाई 43 60. गुरु गम पफौज किला में बड़गी 44 61. सूतो हंस पूरबली जागी काया नगर को लियो हेरो 44 62. समझ गुरु की सैन मन मेरो मग्न भयो 45 63. साधे भाई घर में घर हेरा 45 64. साधे भाई इस विद गगन चढ़ाया 45 65. साधे भाई इस विद सुमिरन किना 46 66. सतगुरु ऐसी समझ बताई 46 67. गुप्त डगरिया हेरी संतो 46 68. साधे भाई इस विद खेली होरी 47 69. संत हरिजन कोई खौज करैला 47 70. जोगी होय थारो जन्म सुधरो 48 71. किले में हो रही हवाई 48 72. साधै भाई सुमिरन लाग रहा 49 73. साधे भाई साँचा सुमिरन किन्हा 49 74. गगन घटा चढ़ा आई बिजलियाँ चमक रही 50 75. साधे भाई इस विद जान पड़ी 50 76. म्हारे गुरु जी बताई गुप्त नगरी 50 77. पत्थर में क्या हेरो मेरे भाई। 51 78. समझ सतगुरु से पाई 51 79. इस नगरी की संतो शोभा न्यारी 52 80. गुरु जी म्हाने शब्द दियो है भारी 52 81. नाथ मैंने दीन्ही सैन खरी 52 82. काया में घूम रहो हस्ती 53 83. लागी म्हारी लगनी गुरु चरणा में 53 84. राम ध्ुन इस विद लागी रे 53 85. साधे भाई सतगुरु समझ बतावै 54 86. साँच कहूँ संतो सही कर मानो 54 87. मन रे राम सुमर मेरे भाई 55 88. तुम भजन करो नर-नारी 55 89. विरह लगी निज नाम की 55 90. संतो मेरे रहे आठ पहर ध्ीणो 56 91. सुरता कलाली म्हाने दारू प्याओ 56 92. मन तु ध्यान आत्मा धर रे 56 93. मना रे राम रटो मेरे भाई 57 94. मुसापिफर प्यारे जागो रैन थोड़ी 57 95. साधे भाई इस विद खेती बाहो 58 96. नारी बिन नर वैफसे होवे 58 97. मैं तनै पूँछू संत जी जाति कहाँ से लाया 59 98. आज म्हारे माहे ले में हरी रंग लाग्यो रे 59 99. राम गुण इस विद गाना रे 59 100.मेरे तो देव गुरु देव है दूजो दाय नहीं आवे 60 101.जागो जुगत विचारो नाम से पावो गती 60 102.जगत कह साधे चोर है 61 103.सुरता सोच विचार अमर पिया संग रही 61 104.मैं तो गुरु जी थानै कबहूँ न भूलू 61 105.साधे भाई सतगुरु सैन बताई 62 106.इन विद गगन चढ़ाया साधे भाई 62 107.साधे भाई इन विद खेती बोई 63 108.हंसला दूर देश अविनाशी 63 109.अबदू बेगम विफ गम जानी 63 110.गजानन्द शिव शक्ति वेफ बाला 64 111.जगत में सत की संगत सुख दाई 64 112.भजन को बड़ो आसरो भारी। 65 113.दोहाμगुरु महिमा 65 114.सत्संग महिमा 72 115.चेतावनी ;121 जीव की रचना का रहस्य व उत्पति 115 वेफ साथ जोड़ेद्ध 78 116.पिण्ड ब्रह्माण्ड भेद-प्रश्न उत्तर 80 117.गुरु-शिष्य प्रश्न-उत्तर ;ज्ञान कसौटीद्ध 102 118.शिष्य माला सादलपुर व पफरीदकोटμनं. 01 114 119.शिष्य माला हूडेरा ;राजस्थानद्धμनं. 02 115 120.शिष्य माला-मुंदड़ो त. रत्तनगढ़ चुरू ;राजस्थानद्धμनं. 03 116 121.शिष्यमाला बड़वासी नं. 04 117 122.शिष्यमाला ढ़ाणी चारणा नं. 05 118 123.शिष्यमाला दिल्ली नं. 06 120 124.शिष्यमाला मानेसर नं. 07 120 125.शिष्यमाला उच्चत ध्ूणे की स्थापना शिव मन्दिर नं. 08 121 126.शिष्यमाला कारोली नं. 09 129 127.शिष्यमाला बटोडी बांस नं. 10 129 128.शिष्यमाला ध्नौन्दा नं. 11 129 129.शिष्यमाला नंगलीगोध नं. 12 130 130. महाराज वेफ शिष्य श्री विचारनाथ महाराज की वाणी 130 131.गणेश महिमाः साधे भाई इस विद् गणेश मनाया 131 132.खोजो म्हारी सुरता नाम सतगुरु का बिनखोजे नही पाई 131 133.समझो हंसा गम सत्गुरु की आपै मै आप समाई 132 134.समझ ले हंसा यहां नहीं डटना सब झूठा जुग 132 135.हंसा सत् का सुमरन कर रै 133 136.गुरु बिना कौन छुड़ावै मेरे भाई 133 137.गुरु का नाम सुमर मेरा भाई 134 138.ऐसा राम रटो मन मेरा दिल की दुर्मत ध्ुप जासी 134 139.सतगुरु जी मेरी नैया पार उतारो 134 140.गुरु बिना वुफण जगावै मेरा भाई 135 141.गुरु की महिमा है बड़ी भारी 135 142.शिष्यमाला सर्व शिष्य नं. 13 135 143.शिष्य सोमनाथ महाराज शिष्यमाला नं. 14 व वाणी 140 144.गणेश मालाः ¬ गुरु जी गणेश आया 140 145.ब्रह्ममन्त्राी जाप ¬ गुरु जी सत्गुरु मिलिया 140 146.वाणी चेतावनीः हंसला राम भजा कर भाई 141 147.वाणीः साधेभाई ईस विद मन को मारो 141 148.जोगियाः चालो उस देश में रे जोगिया ना माया का लेस 142 149.जोगिया आनन्द ऊण देश में रे जोगिया समझ-समझ ध्ूनधर 142 150.शिष्य बुध् नाथ महाराज की वाणी 142 151.मेरी नाव पड़ी मझधर गुरु जी आप लगाओ पार 142 152.मेरे जगे पुरबले भाग गुरु आन मिले सत्संग में। 143 153.रामरंग गाढ़ो र भाई। 143 154.रामध्न जोड़ो मेरे भाई। 143 155.ऊँचा टीला उच्चत गाँव में मन्दिर है एक प्यारा। 144 156.काया रंग चुंदड़ी म्हारे सत्गुरु दिया रंग लाय हे। 144 157.नाम को बाजै इकतारों मेरे भाई। 145 158.चालो म्हारी सुरता गगन मण्डल में पेफरो निरगुण माला रे। 145 159.मनवा राम भजो मेरे बीर कोई दिन राम भजो। 145 160.तेरा माटी में मिले शरीर 146 161.तेरी काया रह अलमस्त भजन में लाले नै सुरती। 146 162.भेखधरी शिष्यों वेफ नाम 146 163.दानी सज्जनों वेफ नाम 147 164.शिवमन्दिर डेरा सेवा समिति उच्चत 148 165.शास्त्रा को शु( करने वालों वेफ नाम 148

Reviews
No reviews added. Be the first one to add review!
Add Review

Write your review about this book. your review will be published within 24 hrs.

*Review
(Max. 200 characters.)
* Name :
*Country :
*Email :
*Type the Code shown
 
 
www.gyanbooks.com is not be responsible for typing or photographical mistake if any. Prices are subject to change without notice.